• वाराणसी • उत्तर प्रदेश
धार्मिक स्थलवाराणसी के घाट लगभग 7 किलोमीटर तक गंगा नदी के पश्चिमी किनारे तक फैले हुए हैं। ये पत्थर की सीढ़ियाँ मुख्य रूप से 14वीं से 18वीं शताब्दी के बीच विभिन्न मराठा शासकों, राजाओं और संरक्षकों द्वारा बनाई गई थीं।
हर घाट का अपना धार्मिक महत्व और इतिहास है:
दशाश्वमेध घाट – सबसे प्रसिद्ध, भव्य संध्या गंगा आरती का स्थल।
मणिकार्णिका घाट – पवित्र शवदाह घाट, जिसे मोक्ष (मुक्ति) देने वाला माना जाता है।
हरीशचंद्र घाट – एक और प्रमुख शवदाह घाट।
असी घाट – पर्यटकों और आध्यात्मिक साधकों के बीच लोकप्रिय।
पंचगंगा घाट – ऐतिहासिक रूप से पांच नदियों के मिलने का महत्वपूर्ण स्थल (पौराणिक विश्वास)।
घाट जीवन, मृत्यु, भक्ति, ध्यान और संस्कृति का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत करते हैं। सूर्योदय की नौकायन सवारी से लेकर संध्याकालीन आरतियों तक, आध्यात्मिक वातावरण अतुलनीय है। स्वयं वाराणसी को दुनिया के सबसे पुराने जीवंत शहरों में से एक माना जाता है।
घाट केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं बल्कि सांस्कृतिक केंद्र भी हैं जहाँ:
क्लासिकल संगीत प्रदर्शन होते हैं
साधु ध्यान करते हैं
तीर्थयात्री पिंड दान करते हैं
योग और आध्यात्मिक अध्ययन सत्र आयोजित होते हैं
What is the best time to visit?
What is the entry fee?
₹ No entry fee , Boat : ₹100 – ₹500