दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के हिमालयी पर्वतों की तलहटी में स्थित एक सुंदर हिल स्टेशन है। इसे "पहाड़ों की रानी" कहा जाता है। यह अपनी प्रसिद्ध चाय बागानों, कंचनजंघा पर्वत के शानदार दृश्यों, औपनिवेशिक वास्तुकला और ऐतिहासिक दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के लिए जाना जाता है। यहाँ का ठंडा मौसम, प्राकृतिक सुंदरता, मठ, स्थानीय संस्कृति और सूर्योदय के मनमोहक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। टॉय ट्रेन की सवारी और चाय बागानों की सैर यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं।
ब्रिटिश शासन के दौरान दार्जिलिंग को ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थल के रूप में विकसित किया गया था। आज भी यहाँ की औपनिवेशिक इमारतें, चर्च और विद्यालय उस इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे यहाँ का प्रमुख आकर्षण है।
टाइगर हिल से हिमालय पर उगते सूरज का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। बतासिया लूप, पीस पगोडा, हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, पद्मजा नायडू प्राणी उद्यान और अनेक बौद्ध मठ भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
दार्जिलिंग विश्व प्रसिद्ध दार्जिलिंग चाय के लिए जाना जाता है। यहाँ के चाय बागानों की सैर पर्यटकों के लिए विशेष अनुभव होती है। नेपाली, तिब्बती, बंगाली और ब्रिटिश संस्कृतियों का सुंदर संगम यहाँ देखने को मिलता है। प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और साहसिक गतिविधियों के कारण दार्जिलिंग भारत का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बना हुआ है।



